एकता में ही शक्ति है
एक घने जंगल में एक घमंडी और क्रूर बाघ रहता था। वह रोज़ छोटे-छोटे जानवरों को सताता था — खरगोश को दौड़ाता, बंदरों को डराता।
एक दिन बाघ ने भेड़ियों का शिकार करने की सोची। लेकिन भेड़िये झुंड में थे — सब मिलकर बाघ पर टूट पड़े और बाघ को वहाँ से भागना पड़ा।
बाघ ने मन में सोचा — "झुंड से नहीं जीत सकता, तो एक-एक को अकेले में फँसाऊँगा।"
कुछ दिन बाद एक भेड़िया झुंड से अलग होकर अकेला जंगल में निकला। बाघ ने मौका देखा और उस पर हमला कर दिया। भेड़िया बुरी तरह घायल हो गया।
जब बाकी भेड़ियों को एहसास हुआ कि एक साथी गायब है, वे उसे ढूँढने निकले। घायल साथी को देखकर सबका दिल भर आया। वे उसे गुफा में ले गए और उसकी देखभाल की।
उसी रात सभी भेड़ियों ने मिलकर एक योजना बनाई। उन्होंने जंगल के उस रास्ते पर जहाँ बाघ रोज़ गुज़रता था — एक बड़ा गड्ढा खोदा, उसमें नुकीले बाँस गाड़े और ऊपर से घास-पत्तों से ढक दिया।
अगली सुबह बाघ घमंड से उसी रास्ते पर दौड़ता आया — और सीधे गड्ढे में जा गिरा। अब वो बाहर नहीं निकल सकता था।
थोड़ी देर बाद एक शिकारी उधर से गुज़रा। उसने बाघ को गड्ढे में फँसा देखा, उसे पिंजरे में कैद किया और जंगल से बाहर ले गया।
पेड़ों की आड़ से भेड़िये, खरगोश और बंदर — सब यह देख रहे थे। सबने राहत की साँस ली। जंगल में फिर से शांति आ गई।